Wednesday, January 6, 2016



जीवन का लक्ष्य

जब फूल खुशी से मुसकाया,
तो माली ने उसको नोच लिया ।
यही हाल होगा गुंचा का कल,
जो आज फूल का हाल हुआ ।।
तेरे साथ भी ऐ भोले प्राणी,
इक दिन ऐसा ही होना है।
काल रूपी माली के हाथों,
तूने भी जीवन खोना है।।
हर एक चीज़ की मियाद रखी,
क़ुदरत ने अलग अलग जानकर ।
नहीं कोई मियाद मगर तेरी,
ऐ बशर! तू दिल में पहचान कर ।।
क़ुदरत ने हर इक वस्तु के,
ज़िम्मे कुछ काम लगाया है।
उस काम की खातिर उसने भी,
गुण वैसा ही अपनाया है ।।
दुनिया में आकर हर इक शै,
अपना काम कर जाती है।
अपनी तासीर मुताबिक़ वह,
रंगो-बू फैला जाती है ।।
तेरा नाम है अशरफ़-अल-मख़लूक़ात,
किरदार क्या होना चाहिये?
रुतबा जग में क्या तेरा है,
क्या काम तेरा होना चाहिये?
कभी यह भी दिल में सोचा है,
तू आया जग में किस ख़ातिर?
क्या हासिल तुझको करना है,
और नर तन मिला हैकिस ख़ातिर?
दुनिया के बखेड़ों में फँसकर,
अपने मक़सद को न कभी समझा ।
जिन्हें छोड़ के तू जाना है,
उन्हीं के मोह में रहा तू उलझा ।।
धन और पदारथ दुनिया के,
और सगे सम्बन्धी भी सारे ।
इनमें नहीं कुछ भी तेरा है,
सब झूठे नाते हैं प्यारे ।।
जब अन्त काल आ जाता है,
नहीं की भी साथ निभाता है।
मालिक का नाम फ़कत प्राणी!
उस समय काम में आता है ।।
अब सोच समझ ले ऐ नादां!
फिर समय न हाथ में आयेगा ।
चुग गयीं खेत जब चिड़ियाँ तो,
तलियाँ मल मल पछतायेगा ।।
तेरी स हालत को लख कर,
है प्रभु को तुझ पे तरस आता ।
वह सच्ची राह दिखाने को,
सन्तों का रूप है धर आता ।।
तेरे इस जीवन को जो मक़सद है,
सत्पुरुष तुझे जतलाते हैं ।
अपने सुन्दर उपदेशों से,
हक़ की पहचान कराते हैं।।
दुर्लभ मानुष तन को पाकर,
दुर्लभ वस्तु को पाना है।
मालिक की भक्ति की न अगर,
तो समय को व्यर्थ गँवाना है ।।
इस दुर्लभ देही की महिमा,
 सन्तों ग्रन्थों ने उचारी है।
इस जीवन की जो करता क़द्र,
क़ीमत उसे मिलती भारी है।।
अनमोल जन्म को पाकर भी,
गर प्रभु का भजन कमाया ना ।
सन्तों की शरण में आकर के,
लोक परलोक बनाया ना ।।
तो अन्त में तुझको ऐ प्राणी!
होगी बहुत ही परेशानी ।
मालिक की दरगाह में तुझको,
बेहद होगी फिर पशेमानी ।।
इसलिये काम तेरा जग में,
केवल प्रभु की भक्ति करना ।
सिवा इसके दीग़र कामों में,
तू चित्त को कभी न धरना ।।
बन्दे से ख़ुदा बनना तुझको,
है लक्ष्य यही जिसे पाना है ।
और शब्द में सुरत मिला करके,
मिल हक़ में हक़ हो जाना है ।।
यह लक्ष्य तभी होगा हासिल,
जब गुरु का दास बन जायेगा ।
तब होगा जीवन सफल तेरा,
गुण सदा गुरु के गायेगा ।।

No comments:

Post a Comment