(51)
बड़े भागों से तुझको, यह मानुष जन्म है मिला ।
यह दुर्लभ अवसर मिला है, इसको यूँही न गँवा ।।
संतों की संगति में आकर, नाम और भक्ति का सच्चा धन कमा ।
न कर देर इसमें, जल्दी से ले अपना काम बना ।।
नाम और भक्ति की कमाई कर ले, जन्म सफल हो जायेगा ।
आवागमन का चक्कर मिट जाये, मुक्ति पदारथ पायेगा ।।
(52)
सेवा गुरु-दबार की, खुशनसीप ही पाते हैं ।
नेक नाम भी होता है, जन्म सफल कर जाते हैं ।।
(53)
आदमी का जिस्म क्या है मानिंद पानी का इक बुलबुला ।
चंद स्वाँस की ज़िन्दगी है इसमें भजन भक्ति का लाभ उठा ।।
मानुष जन्म का बार बार ऐसा अवसर फिर मिलेगा नहीं ।
प्रभु भक्ति की कमाई कर ज़िन्दगी का असली मक़सद है यही ।।
(54)
दुनिया में तू आया बन्दे वणज की ख़ातिर, कर ले वणज खरा ।
सोच समझकर सौदा करना, यह बाज़ार है ख़ूब सजा ।।
तेरे पास है स्वाँसों की पूँजी, इससे काम चलाना है ।
निख परख कर सौदा करना, अगर कुछ लाभ उठाना है।
ऐसा सौदा भूल न करना, जिससे होवे हानि भारी ।
कई मुद्दत के बाद ये अवसर मिला है, फिर मिले न दूजी बारी ।।
चमकत दमक की देख के चींजें, इस पे धन न लुटाना ।
प्रभु नाम का सुमिरण करके, सच्चा धन कमाना ।।
ऐसा सच्चा सौदा कर ले, जो परलोक में तेरे संग जाये ।
सच्चे नाम की कर ले कमाई, सहु देखे पतियाये ।।
(55)
लाखों प्रेमी भक्त, रहते हैं हरिद्वार ।
क्या कोई दावा कर सके, पहुँचा हो हरि-द्वार ।।
हरिद्वार में खुल गया- आज गुरु का द्वार ।
सहजे-सहजे पहुँचेंगे, सब प्रेमी हरि के द्वार ।।
(56)
बड़े भागों से मिला तुझे यह जामा-ए-इन्सानी ।
अफ़सोस सद बार तूने इसकी क़द्र न जानी ।
बेशक़ीमत मिला था ये जामा मालिक की बन्दगी के लिये ।
बन्धनों से छुटकारा पाने और रूह की फ़र्ख़न्दगी के लिये ।।
क्या काम तूने इस तन इन्सानी से लिया ।
विषयों में फँस कर जन्म यूँही बरबाद किया ।
महापुरुष इस दुर्लभ अवसर की याद दिलाते हैं।
कि ऐसे अवसर फिर न बार-बार हाथ आते हैं ।
मानकर सन्तों के वचन जो अपना काम कर जाते हैं ।
नाम भक्ति की सच्ची कमाई कर वो भव से तर जाते हैं ।।
(57)
दुर्लभु मानुष जन्म को पाकर, किसने लाभ उठाया है।
दुनिया की ममता छोड़कर, जो सन्त शरण में आया है ।।
गुरु शब्द की करके कमाई, सच्चा धन कमाया है ।
जीवन भी खुशियों से भर लिया, दरगाह में मान माया है ।।
(58)
कई जन्मों से जीवात्मा को, बहुत इन्तज़ार थी ।
वो अपने मक़सद को पाने के लिये, बहुत बेक़रार थी ।।
भागों से मिल गया मानुष जन्म, इससे सच्चा लाभ उठा ले ।
मालिक की कर भजन बन्दगी, जीवन सफल बना ले ।।
(59)
दुनिया में जिसने दिल लगाया, उसकी हालत ज़ार है।
जिस गुरुमुख ने भक्ति को अपनाया, उसका दिल सरशार है ।।
(60)
सत्त नाम को छोड़कर, माया संग करे प्यार ।
सत्न त्याग कौड़ी संग रचै, देखा यह संसार ।।
सत्संग मिले तो सोझी पावै, मिटे अज्ञान अंधकार ।
ज्ञान प्रकाश जब हिरदै जागै, तब पावै तत् का सार ।।
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