Wednesday, January 6, 2016


सन्तों का उपकार
दुनिया की अवस्था देखकर एक प्रेमी,
अपने दिल का हाल सुनाता है।
देखकर ये चहल पहल वो,
अपने मन को समझाता है।।
बचपन में कुछ समझ न थी,
वो खेल कूद में निकल गया ।
बाल अवस्था आई तो दिल में,
पढ़ने लिखने का शौक हुआ ।।
कुछ वक़्त गुज़रा तो दिल में,
कुछ-कुछ ख़्याल उठने लगे।
किस तरफ़ से ये लोग आये हैं
और किस तरफ़ ये जाने लगे ।।
कोई जाता है पश्चिम कोई पूरब
की तरफ़ को जाता है ।
कोई जाता है उत्तर की और
कोई दक्खिन को भागा जाता है ।।
एक से पूछा दूसरे से पूछा
क्यों दौड़-धूप तुम करते हो।
क्या मतलब है इस भाग दौड़ का
क्यों इतना घबराते हो ।।
सबका यही जवाब है मिलता,
हम अपने काम को जाते हैं ।
सारा दिन काम हैं करते
फिर रोज़ी का ढंग बनाते हैं ।।
दिन भर हम काम हैं करते
रात को बच्चों को खिलाते हैं ।
सारे दिन के थके मांदे
घर में आराम पाते हैं ।।
इसी तरह करते करते
जवानी से बुढ़ापा आ गया ।
शरीर भी दुर्बल हो गया और
काल का परवाना आ गया ।।
स्वाँसों की पूँजी खत्म हुई,
वक़्त आख़िरी आ गया ।
घर वाले सब देखते रह गये,
काल उसको ले गया ।।
कहाँ से आया था कहाँ चला गया है,
ये न किसी को ख्याल हुआ ।
साथ में क्या लाया था अब क्या ले गया,
ये भी न कुछ ख़्याल हा ।।
अन्दर से ये ख़्याल उठा कि
कुदरत ने इसको यहाँ क्यों भेजा था?
किस मतलब के लिये यहां आया था
किस काम के लिये यहाँ भेजा था?
संतों की बाणी ये बतलाती है कि
ये आया था किसी ख़ास काम के लिये।
जन्मों से इसकी रूह भटक रही थी
उसको आज़ाद कराने के लिये ।।
ये मानुष चोला मिला था इसलिये कि
इसमें मालिक की भक्ति करता ।
भक्ति करके भगवान की ये
मानुष-जन्म से लाभ उठाता ।।
यहाँ भी आकर इसने कोई
इधर ध्यान ही नहीं दिया ।
माया के ग़लवे में आकर इसने,
अपने काम को भुला ही दिया ।।
आख़िर को नतीजा क्या होगा जो
इसकी रूह को बन्धन पड़ जायेगा ।
बड़ी मुश्किल से ये छूटा ता फिर
चौरासी का फंदा पड़ जायेगा।।
अमूमन जो जीव दुनिया में आते हैं
माया के ग़लवे में आ जाते हैं।
जिस मक़सद के लिये वो आते हैं
उसको दिल से बिल्कुल भुला देते हैं ।।
क़ुदरत की तरफ़ से सन्त-महापुरुषों का
दुनिया में ज़हूर होता है।
भूली-भटकी रूहों को माया के
ग़लबे से आज़ाद कराना होता है।।
भाग से जो जीव इनकी
शरण में आ जाते हैं ।
भक्ति का सद् मार्ग दिखलाकर
बन्धन से आज़ाद कराते हैं ।।
ऐ भोले प्राणी तू भी संतों की शरण में आ
और अपने काम को याद कर ।
जिस मक़सद के लिये यहाँ आया है,
उसके लिये फ़रियाद कर ।।
सन्त-महापुरुष दया करके तुझ को,
वो रास्ता दिखलायेंगे ।
जिस पर चलने से तेरा काम बनेगा,
और अपने घर पहुँचायेंगे ।।

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